समयदान
अपने दैनिक समय का एक अंश समाज के कल्याण को दान करना।
गुरुदेव कहते हैं कि समय वही एक संसाधन है जो हर किसी के पास है। 8 घंटे कमाने को दें, 8 विश्राम को, फिर भी घंटे बचते हैं — जिनका अधिकांश आलस्य और समय-पास में फिसल जाता है। उसी का एक भाग वापस पाकर मिशन को दान करें: रात्रि पाठशाला में अनपढ़ों को पढ़ाना, सद्विचार फैलाना, संगठन करना, जरूरतमंदों की सेवा। उन्होंने न्यूनतम एक घंटा प्रतिदिन रखा, और जो दे सकें उनसे अधिक माँगा — चार घंटे तक। यही समयदान है: एक बेहतर समाज के निर्माण-कार्य को अपने घंटों का नियमित दान, जिसका सर्वोच्च रूप है ज्ञान बाँटना (ज्ञान-यज्ञ)।





