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अखिल विश्व गायत्री परिवारBengaluru

साधना

AWGP में आध्यात्मिक साधना का केंद्र

साधना ही AWGP में आत्म-परिवर्तन का आधार है। गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के अनुसार, साधना केवल कर्मकांड नहीं — यह भीतर की शुद्धि, आत्म-अनुशासन और जागरण का एक क्रमबद्ध मार्ग है। AWGP बेंगलुरु में हम साधना के कई रूप प्रस्तुत करते हैं, हर एक अलग समय और रुचि के अनुकूल। सभी सबके लिए खुले हैं — किसी पूर्व-अनुभव की आवश्यकता नहीं।

अखण्ड जप

अखण्ड जप

🕐 हर दूसरे शनिवार · समय-समय पर विशेष आयोजन · चेतना केंद्र में

बिना रुके चलने वाला सामूहिक गायत्री मंत्र जप — एक अटूट ध्वनि-प्रवाह जो पूरे वातावरण को पवित्र कर देता है।

अखण्ड जप एक सामूहिक साधना है जिसमें गायत्री महामंत्र का जप घंटों तक बिना रुके चलता रहता है। साधक बारी-बारी से जुड़ते हैं, ताकि पवित्र ध्वनि कभी न थमे — इसी निरंतरता से एक प्रबल आध्यात्मिक प्रवाह बनता है। गुरुदेव कहते हैं, मंत्र का उद्देश्य है उसके सूक्ष्म स्पंदनों को अपने रोम-रोम तक झंकृत कर देना — जैसे एक तार छेड़ने पर पूरा साज गूँज उठता है। जप गायत्री माता का आवाहन है, जो सात्विक भाव से किए गए हर प्रयास को स्वीकार करती हैं। इसके लिए किसी विशेष पात्रता या पूर्व-अनुभव की आवश्यकता नहीं — परिवार, युवा और वरिष्ठ, सभी सहज भाव से जुड़ सकते हैं। पूरे समय अखण्ड दीपक और धूप का वातावरण साधना को और गहरा बनाता है।

  • घंटों तक बिना रुके सामूहिक गायत्री जप — कोई पूर्व-अनुभव आवश्यक नहीं
  • सभी के लिए खुला — परिवार, युवा व वरिष्ठ सहज भाव से सम्मिलित हों
  • अखण्ड दीपक व धूप के बीच गहन, पवित्र वातावरण
गायत्री अनुष्ठान

गायत्री अनुष्ठान

🕐 चैत्र व आश्विन नवरात्रि · नौ दिन प्रत्येक

नवरात्रि के नौ दिनों की एक तपमय गायत्री साधना — जप, संयम और हवन का संगम।

गायत्री अनुष्ठान नवरात्रि के नौ दिनों में किया जाने वाला एक लघु पुरश्चरण है, जिसमें कुल 24,000 गायत्री मंत्रों का जप पूरा होता है — रोज़ 27 माला, लगभग ढाई घंटे। यह केवल जप नहीं, एक तपश्चर्या है। दो नियम अनिवार्य हैं — ब्रह्मचर्य और उपवास (फल, दूध या सात्विक अल्पाहार)। तीन वैकल्पिक नियम भी हैं — भूमि पर शयन, अपनी सेवाएँ स्वयं करना, और हिंसा से बने पदार्थों का त्याग। साधक पूर्व की ओर मुख कर, गायत्री माता व गुरु का आवाहन कर जप आरंभ करता है। नौ दिन पूरे होने पर दसवें दिन हवन, ब्रह्मभोज और कन्या-भोजन से पूर्णाहुति होती है। संयम जितना दृढ़, साधना उतनी ही फलवती।

  • नौ दिन में 24,000 मंत्र जप — रोज़ 27 माला, लगभग ढाई घंटे
  • ब्रह्मचर्य व उपवास अनिवार्य — संयम से साधना की शक्ति बढ़ती है
  • दसवें दिन हवन, ब्रह्मभोज व कन्या-पूजन से पूर्णाहुति
अन्तः ऊर्जा जागरण

अन्तः ऊर्जा जागरण

🕐 पाँच दिवसीय आवासीय सत्र · तिथियाँ पहले से घोषित

भीतर की सोई हुई ऊर्जा को जगाने वाला पाँच दिन का मौन साधना सत्र — पूर्ण एकांत और आत्म-मंथन के साथ।

अन्तः ऊर्जा जागरण एक पाँच दिवसीय आवासीय मौन-साधना है, जिसमें साधक पूरे समय एकांत और अंतर्मुखता में रहता है। मोबाइल, समाचार-पत्र और बाहरी पढ़ाई से पूर्ण विराम — ध्यान सिर्फ़ भीतर। दिन की शुरुआत सुबह चार बजे उषापान और आत्मबोध से होती है, फिर ध्यान, प्राण-संचार प्राणायाम, गायत्री जप, सोऽहम् और नादयोग जैसी साधनाएँ क्रम से चलती हैं। पहले ही दिन "निष्कासन तप" होता है — मन की पुरानी गाँठें और मलिनताएँ गुरुसत्ता के सामने खोल देने का अभ्यास। लगभग छह घंटे गहन साधना और दो घंटे स्वाध्याय-चिंतन के लिए होते हैं। उद्देश्य कोई मनोकामना नहीं — बस आत्म-परिष्कार और भीतर की ऊर्जा का जागरण, ताकि जीवन एक नई दिशा पा सके।

  • पाँच दिन पूर्ण मौन व डिजिटल डिटॉक्स — गहन अंतर्मुखी साधना
  • आत्मबोध, ध्यान, जप, सोऽहम् व नादयोग का क्रमबद्ध दैनिक अभ्यास
  • "निष्कासन तप" — मन की गाँठें खोलकर भीतर से हल्का होने का अवसर
चान्द्रायण कल्प साधना

चान्द्रायण कल्प साधना

🕐 चंद्र-चक्र आधारित · वर्ष में एक बार · तिथियाँ पहले से घोषित

चंद्रमा की कलाओं के साथ चलने वाली एक महीने की आहार-साधना — शरीर, मन और अंतःकरण की गहरी सफाई।

चान्द्रायण एक प्राचीन कल्प-साधना है जो पूर्णिमा से अगली पूर्णिमा तक, पूरे एक महीने चलती है। इसमें आहार को चंद्रमा की घटती-बढ़ती कलाओं के साथ धीरे-धीरे कम और फिर बढ़ाया जाता है। पर यह केवल उपवास नहीं है — गुरुदेव कहते हैं, "कल्प" का अर्थ है भीतर से बाहर तक पूरी तरह बदल जाना। इसलिए साथ-साथ गायत्री उपासना, प्राणायाम, आत्म-निरीक्षण और संचित गलत आदतों का प्रायश्चित भी चलता है। संयम को "तप" और भीतर के बदलाव को "योग" कहते हैं — चान्द्रायण में दोनों एक साथ हैं। नए साधकों के लिए सरल "मृदु" रूप है, और गहरे अभ्यास के लिए "यति" रूप। उद्देश्य एक ही — तन की नीरोगता, मन की शांति और जीवन-दृष्टि का नवनिर्माण।

  • चंद्र-कला के अनुसार आहार — पूर्णिमा से पूर्णिमा तक घटता-बढ़ता क्रम
  • रोज़ गायत्री उपासना, प्राणायाम व स्वाध्याय के साथ आत्म-शुद्धि
  • मृदु (सरल) व यति (गहन) — दोनों रूप, हर स्तर के साधक के लिए

📅 साधना समय-सारणी

🕉 अखंड जप — हर 2रे शनिवार 🔥 अनुष्ठान — नवरात्रि (9 दिन) 🧘 अंतः-ऊर्जा — समय-समय पर 🌙 चांद्रायण — वार्षिक

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