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अखिल विश्व गायत्री परिवारBengaluru

हमारे बारे में

आंतरिक संतुलन पाएं · आधुनिक साधक के लिए वैज्ञानिक अध्यात्म

वैश्विक आंदोलन

अखिल विश्व गायत्री परिवार

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शांतिकुंज, हरिद्वार — वैश्विक मुख्यालयशांतिकुंज, हरिद्वार — वैश्विक मुख्यालय
समाधि स्थलसमाधि स्थल
अखंड दीपकअखंड दीपक
गायत्री माता मंदिरगायत्री माता मंदिर
देव संस्कृति विश्वविद्यालयदेव संस्कृति विश्वविद्यालय
शिविर — ९-दिवसीय आवासीय शिविरशिविर — ९-दिवसीय आवासीय शिविर

गायत्री परिवार मानवीय एकता और समता के सिद्धांतों पर आधारित एक भविष्योन्मुखी समाज का जीवंत प्रतिरूप है। यह वैदिक ऋषियों की सनातन प्रज्ञा का आधुनिक रूपांतरण है, जिन्होंने 'वसुधैव कुटुम्बकम्' — 'सारा विश्व एक परिवार है' — का आचरण और प्रचार किया। हमारा ध्येय सरल है: स्वस्थ शरीर, पवित्र मन और सभ्य समाज, तथा जाति, वर्ण या मत के भेद बिना सबको आत्म-विकास का समान अवसर। तकनीक, समय-सीमा और डिजिटल अधिभार से भरे इस तेज़ शहर में, AWGP बेंगलूरु एक ऐसा स्थान है जहाँ आप रुककर, स्वयं को संवारकर भीतर से विकसित हो सकें — गायत्री साधना, ध्यान, योग, यज्ञ और निःस्वार्थ सेवा के माध्यम से।

15M+विश्वव्यापी सदस्य
100+देश
3000+गुरुदेव की पुस्तकें
1971स्थापना वर्ष

हमारे संस्थापक

विचार क्रांति अभियान के पथ-प्रदर्शक

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युग ऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य

युग ऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य

गुरुदेव · १९११–१९९०

संत, सुधारक, लेखक, दार्शनिक और दृष्टा गुरुदेव का जन्म २० सितंबर १९११ को आँवलखेड़ा, आगरा में हुआ। चौदह वर्ष की आयु में उन्हें अपने हिमालयवासी गुरु का मार्गदर्शन मिला, और आगे चलकर उन्होंने गायत्री महामंत्र के २४ महापुरश्चरण किए। गांधीजी के आशीर्वाद से उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। उन्होंने संपूर्ण वैदिक वाङ्मय का सरल हिंदी में अनुवाद किया, ३,००० से अधिक ग्रंथ रचे और जन-जन के आध्यात्मिक, नैतिक व सामाजिक उत्थान हेतु १०० सूत्री युग निर्माण योजना दी। उन्होंने शांतिकुंज, ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान और मासिक 'अखंड ज्योति' (१९४०) की स्थापना की। गायत्री माता के परम भक्त, उन्होंने गायत्री जयंती, २ जून १९९० को स्वेच्छा से देह त्यागी।

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वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा

वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा

माताजी · १९२६–१९९४

सितंबर १९२६ में जन्मीं माताजी आचार्यजी की आध्यात्मिक सहधर्मिणी और करोड़ों गायत्री परिजनों की मातृ-स्वरूपा थीं। शांतिकुंज के आरंभिक दिनों में उन्होंने देव-कन्याओं के सहयोग से गायत्री मंत्र के २४ महापुरश्चरण पूर्ण किए। १९९० में गुरुदेव की महासमाधि के बाद उन्होंने 'अखंड ज्योति' के संपादन से लेकर आश्रम-प्रबंधन तक संपूर्ण मिशन को अदम्य साहस से आगे बढ़ाया और देव संस्कृति के विश्व-प्रसार हेतु भव्य अश्वमेध यज्ञों की श्रृंखला आरंभ की। उनके असीम प्रेम ने ही परिवार को एक सूत्र में बाँधे रखा। आधुनिक युग में नारीत्व का आदर्श।

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वर्तमान नेतृत्व

हमारे मार्गदर्शक

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विचार क्रांति के वैश्विक आंदोलन का मार्गदर्शन

श्रद्धेय डॉ. प्रणव पंड्या

श्रद्धेय डॉ. प्रणव पंड्या

प्रमुख, अखिल विश्व गायत्री परिवार
  • कुलाधिपति, देव संस्कृति विश्वविद्यालय
  • निदेशक, ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान
  • संपादक, अखंड ज्योति

पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के निकटवर्ती एवं प्रत्यक्ष शिष्य, डॉ. प्रणव पंड्या वैज्ञानिक अध्यात्म के अग्रदूत के रूप में विख्यात हैं। उनके ओजस्वी नेतृत्व में देव संस्कृति विश्वविद्यालय प्राचीन प्रज्ञा को आधुनिक विज्ञान से जोड़कर शिक्षा को नया रूप दे रहा है।

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श्रद्धेया शैलबाला पंड्या

श्रद्धेया शैलबाला पंड्या

प्रबंध न्यासी, शांतिकुंज
  • सभी परिजनों की प्रिय "जीजी"
  • विचार क्रांति अभियान की प्रमुख
  • मनोविज्ञान में परास्नातक

जीजी के रूप में पूजनीया, वे असीम प्रेम की प्रतिमूर्ति हैं; भक्त कहते हैं उनके दर्शन मात्र से कष्ट दूर होते हैं। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मनोविज्ञान में परास्नातक, वे विचार क्रांति अभियान — विचारों के परिष्कार का आंदोलन — का नेतृत्व करती हैं।

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डॉ. चिन्मय पंड्या

डॉ. चिन्मय पंड्या

प्रति-कुलपति, देव संस्कृति विश्वविद्यालय
  • प्रति-कुलपति, देव संस्कृति विश्वविद्यालय
  • भारत और यूके में चिकित्सा प्रशिक्षण
  • रॉयल कॉलेज ऑफ साइकिएट्रिस्ट्स के सदस्य (MRCPsych)

AWGP के अग्रणी युवा प्रतिनिधि, डॉ. चिन्मय पंड्या ने भारत और यूके में चिकित्सा प्रशिक्षण प्राप्त कर रॉयल कॉलेज ऑफ साइकिएट्रिस्ट्स की सदस्यता अर्जित की। वे विश्वभर के युवाओं को वैज्ञानिक अध्यात्म की दिशा में मार्गदर्शन देते हैं और मिशन की अनेक अंतरराष्ट्रीय व शैक्षणिक गतिविधियों का नेतृत्व करते हैं।

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उद्देश्य एवं दृष्टि

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दृष्टि

मनुष्य में देवत्व का उदय और धरती पर स्वर्ग का अवतरण — एक ऐसा संसार जहाँ हर व्यक्ति ज्ञान, करुणा और उद्देश्य के साथ जीता है और एक शांत, जाग्रत समाज का निर्माण करता है।

मिशन

प्राचीन वैदिक शिक्षाओं को आधुनिक विज्ञान के साथ समन्वित कर दैनिक जीवन में उतारकर व्यक्ति की चेतना का विकास करना। संस्कारित व्यक्ति विश्वास और सहयोग से भरे परिवार बनाते हैं, और वही शांतिपूर्ण समाज की नींव बनते हैं।

स्वस्थ शरीर, पवित्र मन और सभ्य समाज की ओर।

  • व्यक्ति का चरित्र-निर्माण और परिष्कार
  • नारी सशक्तिकरण और प्रेम-सहयोग से युक्त परिवार-निर्माण
  • सार्वभौमिक दान और प्रकृति-सेवा द्वारा सामाजिक परिवर्तन
  • विचार क्रांति, नैतिक क्रांति और सामाजिक क्रांति

हमारा दृष्टिकोण

स्वयं बदलें, युग बदलेगा

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उपासना

किसी भी रूप में ध्यान या प्रार्थना — परमात्मा के निकट जाना।

साधना

आत्म-संयम और अपने साधनों का विवेकपूर्ण उपयोग।

आराधना

समाज और समस्त प्राणियों की निःस्वार्थ सेवा।

स्रोत व आगे पढ़ें

अखिल विश्व गायत्री परिवार की आधिकारिक वेबसाइट awgp.org से लिया गया प्रामाणिक विषय:

हमारे बारे में — हमारी कहानी, संस्थापक एवं ध्येय | AWGP Bengaluru — Gayatri Pariwar Bangalore