मध्य जनवरी (14 जनवरी)मकर संक्रांति
सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व — प्रकाश, फसल और नए आरंभ के प्रति कृतज्ञता का दिन।
हर त्योहार, परमात्मा की ओर एक साझा कदम।
गायत्री परिवार के लिए त्योहार केवल छुट्टी का दिन नहीं है। हर पर्व रुकने, साथ आने और दिन को किसी उच्चतर भाव की ओर मोड़ने का अवसर है। गुरुदेव सिखाते थे कि हमारे त्योहारों के रीति-रिवाजों के नीचे गहरा अर्थ छिपा है — हर पर्व किसी मूल्य, किसी ऋतु या जीवन के किसी मोड़ का स्मरण है। एडब्ल्यूजीपी बेंगलुरु में हम हर प्रमुख त्योहार को एक सामूहिक आध्यात्मिक अनुभव के रूप में मनाते हैं: वायु और हृदय को शुद्ध करने वाला यज्ञ या हवन, भाव को उठाने वाले कीर्तन-भजन, पर्व के सच्चे संदेश पर चिंतन हेतु सत्संग, और सबमें बँटता प्रसाद। इस भाव से मनाया गया त्योहार हर व्यक्ति की भीतरी वृद्धि का एक शांत कदम बन जाता है।
हर प्रमुख भारतीय पर्व — यज्ञ, कीर्तन, सत्संग और प्रसाद के साथ। निःशुल्क और सबके लिए।
मध्य जनवरी (14 जनवरी)सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व — प्रकाश, फसल और नए आरंभ के प्रति कृतज्ञता का दिन।
माघ शुक्ल पंचमी (जन/फर)वसंत के आगमन और ज्ञान की देवी सरस्वती की उपासना का पर्व — गायत्री परिवार में विशेष रूप से प्रिय तथा गुरुदेव के आध्यात्मिक जन्म दिवस के रूप में मनाया जाने वाला पावन दिन।
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (फर/मार्च)शिव की महानिशा — उपवास, रात्रि-जागरण और शिव के प्रतीक भीतरी निस्तब्धता पर ध्यान के साथ मनाया जाने वाला पर्व।
8 मार्चमिशन के हृदय के निकट एक आधुनिक पर्व — नारी शक्ति का सम्मान और गुरुदेव की उस दृष्टि का स्मरण जिसमें नारी नवयुग की अगुवा है।
फाल्गुन पूर्णिमा (मार्च)रंगों और वसंत का पर्व — द्वेष-रहित, सात्विक और सौहार्दपूर्ण भाव से संबंधों के आनंदमय नवीनीकरण के रूप में मनाया जाता है।
चैत्र व आश्विन (वर्ष में दो बार)देवी माँ की नौ रात्रियाँ, और गायत्री अनुष्ठान का प्रमुख काल — जप, संयम और हवन की नौ-दिवसीय सघन साधना।
ज्येष्ठ (मई/जून, गंगा दशहरा के साथ)आद्य शक्ति वेदमाता गायत्री का धरती पर अवतरण — गायत्री परिवार का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पर्व, और वह दिन जब 1990 में गुरुदेव अपनी आराध्य में विलीन हुए।
आषाढ़ पूर्णिमा (जुलाई)गुरु के सम्मान का दिन — गुरुदेव और गुरु-परंपरा के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और आगामी वर्ष के लिए नए संकल्प के साथ।
श्रावण पूर्णिमा (अगस्त)रक्षा का बंधन — मिशन में श्रावणी के रूप में मनाया जाता है, आत्म-शुद्धि और धर्म व परस्पर रक्षा के संकल्प का दिन।
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (अग/सित)भगवान कृष्ण का जन्म — भजन, कीर्तन और गीता के निःस्वार्थ, धर्मपूर्ण कर्म के संदेश पर चिंतन के साथ मनाया जाता है।
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (अग/सित)विघ्नहर्ता और बुद्धि के स्वामी गणेश की पूजा — हर शुभ कार्य के आरंभ में जिनका आवाहन किया जाता है।
कार्तिक अमावस्या (अक्तू/नव)दीपों का पर्व — अंधकार को दूर करती दीपमालाएँ, अज्ञान पर प्रकाश की विजय के रूप में मनाई जाती हैं। गायत्री परिवार में यह भीतरी शुद्धि, ज्ञान-दीप के प्रज्वलन और सद्गुण रूपी लक्ष्मी की उपासना का अवसर है।
गायत्री मंत्रों के साथ पवित्र अग्नि में आहुति — स्थान और हृदय को शुद्ध करती है।
भक्तिपूर्ण भजन और कीर्तन जो भाव को ऊपर उठाते हैं और सबको साझा आनंद में एक करते हैं।
पर्व के सच्चे अर्थ पर एक लघु प्रवचन — गुरुदेव के ज्ञान में निहित।
सभी में बँटा पवित्र प्रसाद — गायत्री परिवार की उदार भावना का प्रतीक।
हमारे त्योहार-कार्यक्रमों में बेंगलुरु चेतना केंद्र के साथ सम्मिलित हों — परिवार और नए साधक, सभी का हार्दिक स्वागत है।