AWGP में योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है। गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के अनुसार, योग शरीर, मन और आत्मा को जोड़ने का विज्ञान है — ऋषियों द्वारा दिया गया एक व्यावहारिक मार्ग, स्वस्थ, संतुलित और सार्थक जीवन के लिए। बेंगलुरु में हम इसी दृष्टि का अनुसरण करते हैं, सभी के लिए खुले नियमित मार्गदर्शित सत्रों के साथ।
योग पर AWGP की दृष्टि
वैदिक युग के ऋषियों ने मानवता को स्वास्थ्य का एक अमूल्य विज्ञान दिया। समय के साथ, जैसे-जैसे जीवन अधिक भौतिक और भागदौड़ भरा होता गया, इसका बहुत कुछ भुला दिया गया। गुरुदेव ने देखा कि आज के मनुष्य को इस ज्ञान की पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है — पर ऐसे रूप में जो व्यस्त जीवन में सध सके। उन्होंने सिखाया कि सच्चा योग व्यक्ति की तीनों परतों पर एक साथ काम करता है: आसन से शरीर का पुनर्नवीनीकरण होता है, प्राणायाम (श्वास) से मन सशक्त होता है, और मंत्र से अंतरात्मा जागृत होती है। इस दृष्टि में योग कठिन आसनों या संसार से पलायन का नाम नहीं — यह अपने समूचे अस्तित्व को संतुलन में लाने का दैनिक अभ्यास है, ताकि स्वास्थ्य, शांति और स्पष्टता सहज बन जाएँ।
प्रज्ञा योग — आधुनिक साधक को गुरुदेव का उपहार
महर्षि पतंजलि की परंपरा का आधार लेकर, गुरुदेव ने आम लोगों के लिए एक सरल और संपूर्ण अभ्यास रचा और उसे प्रज्ञा योग नाम दिया। यह सोलह सरल आसनों का एक प्रवाहमय क्रम है, हर आसन गायत्री मंत्र के एक-एक अक्षर और गहरी, स्थिर श्वास के साथ किया जाता है। खड़े होकर — सविता (उगते सूर्य) के प्रकाश का क्षण भर ध्यान करते हुए — साधक पूरे भाव से इस क्रम में आगे बढ़ता है। इस एक ही अभ्यास में आसन शरीर की देखभाल करता है, श्वास प्राणायाम का काम करती है, और मंत्र मन को भीतर ले जाता है — इस तरह यह तीनों शरीरों (स्थूल, सूक्ष्म व कारण) को एक साथ सहज रूप से स्पर्श करता है। एक चक्र में केवल लगभग दस मिनट लगते हैं, न कोई उपकरण चाहिए न कोई खर्च, और यह हर आयु के लिए उपयुक्त है। गायत्री ध्यान के साथ श्रद्धापूर्वक करने पर यह अष्टांग योग के लाभ सुलभ रूप में देता है।
- गायत्री मंत्र के अक्षरों से जुड़ा सोलह सरल आसनों का क्रम
- आसन, श्वास और मंत्र एक साथ — शरीर, मन व अंतरात्मा की देखभाल
- एक चक्र लगभग दस मिनट · कोई उपकरण नहीं · हर आयु के लिए उपयुक्त
AWGP बेंगलुरु में योग सत्र
महिला योग (केंद्र में)
🕐 सुबह 11:00 – दोपहर 12:00 · चेतना केंद्र में प्रत्यक्षमहिलाओं के लिए एक मार्गदर्शित प्रातःकालीन सत्र, केंद्र में प्रत्यक्ष रूप से। प्रज्ञा योग के आसन, श्वास और गायत्री ध्यान साथ मिलकर सीखने का एक शांत, स्वागतपूर्ण स्थान — किसी पूर्व-अनुभव की आवश्यकता नहीं।
ऑनलाइन योग (सभी के लिए)
🕐 शाम 5:30 – 6:30 · ऑनलाइन · सभी के लिए खुलाशाम का एक सत्र जो सभी के लिए खुला है, जहाँ भी आप हों वहीं से ऑनलाइन जुड़ें। मार्गदर्शित आसन, श्वास और ध्यान के साथ दिन को शांत करें — पुरुष, महिला, युवा और वरिष्ठ, सभी के लिए उपयुक्त।
और जानें — पुस्तकें व संसाधन
गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य की ये पुस्तकें आसन, प्राणायाम और उनके पीछे के विज्ञान में और गहराई से ले जाती हैं। ऑनलाइन निःशुल्क पढ़ें, या प्रति मँगवाएँ।
🙏 भाग लें
अधिक जानकारी या पंजीकरण के लिए हमसे संपर्क करें — सभी का स्वागत है, पूर्व-अनुभव आवश्यक नहीं।




