इंद्रिय संयम
इंद्रियों पर नियंत्रण — विशेषकर जिह्वा और कामेंद्रिय पर।
सभी इंद्रियों में सबसे कठिन और सबसे महत्त्वपूर्ण है जिह्वा और कामेंद्रिय का संयम — ये सबसे लालची और 'व्यसन' की ओर सबसे जल्दी झुकने वाली हैं। जिह्वा का लोभ पाचन बिगाड़ता है और स्वास्थ्य चौपट करता है; अनियंत्रित वाणी शत्रुता और अपमान बुलाती है; प्राणशक्ति का अनियंत्रित क्षय तन और मन दोनों को दुर्बल करता है। गुरुदेव स्पष्ट कहते हैं: इनके संयम के बिना स्थायी स्वास्थ्य, बल और दीर्घायु संभव ही नहीं। अस्वाद-व्रत (स्वाद नहीं, पोषण के लिए भोजन) और ब्रह्मचर्य इसके मूल अभ्यास हैं।





